विकास वाली तवलीन सिंह से यस बैंक वाली पायल रोहतगी तक: भक्तों, सब याद रखा जायेगा

अति आभिजात्य, एक समय बड़े पाकिस्तानी नेता, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हक़ में लड़ते हुए शहीद हो जाने वाले गवर्नर सलमान तासीर की पत्नी,

उनके बेटे आतिश तासीर की माँ तवलीन सिंह।

एक और छोटीमोटी मराठी अभिनेत्री नूपुर अलंकार।

सी ग्रेड बॉलीवुड सेक्स फ़्लिक्स अभिनेत्री से हिंदुत्व धर्म रक्षिका बन गई पायल रोहतगी।

कोई कारण दिखता है, ऐसे अजीब, बिना किसी साझेदारी वाले तीन लोगों का एक ही पक्ष में खड़े होना?

संभव ही नहीं लगता न? पर ये तीनों खड़े थे।

वजह सिर्फ़ 1. इनके अंदर भरी हुई सामुदायिक घृणा। नफरत जो इस देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की राजनीति का आधार रही है तो पाकिस्तान में वहाँ के बहुसंख्यकों की राजनीति का आधार।

भले ही तवलीन सिंह उसे विकास की बकवास के पर्दे में छुपा कर पेश करें और पायल रोहतगी और नुपुर अलंकार बिना किसी लाग लपेट के- असल में इन तीनों के एक साथ खड़े होने की वजह यही थी

कमाल ये कि तीनों फिर से एक साथ खड़े हैं।

पर बहुत बदले हुए आधार पर चाहे इनकी घृणा न बदली हो, इनकी आज की वजहें एकदम बदल गई हैं।

अब की बार इनके साथ खड़े होने का आधार है धोखा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की राजनीति के साथ साथ ख़ुद मोदी जी द्वारा दिया गया धोखा।

उस पर आने के पहले इन तीनों की राजनीति याद करते हैं। 

इन तीनों ने मोदी जी और उनकी सरकार के हर क़दम को हर कार्रवाई को मास्टर स्ट्रोक बताया था।

नोटबंदी: वाह वाह- काला धन, भ्रष्टाचार, नक्सलवाद, यहाँ तक की वेश्यावृत्ति तक ख़त्म- एक आँसू भी उन लोगों के लिये नहीं जो क़तारों में मर गये, उन बैंककर्मियों के लिये जो नोट गिनते मर गये, जिन्होंने गलती करने पर जुर्माने भरे, जिन ग़रीबों की ज़िंदगी भर की कमाई लुट गई!

जीएसटी: फिर से- बर्बाद हो गये छोटे व्यापारियों के लिए कोई संवेदना नहीं।

पीएमसी बैंक: मुफ़्तख़ोर थे साले! 0.25% ज़्यादा ब्याज के लिये खुद ही बर्बाद हुए।

बालाकोट: वाह। इतिहास बदल गया!

बिना एक बार पूछे कि पुलवामा के शहीदों की मौत का ज़िम्मेदार कौन है, यह तक कि असल में शहीद कितने हुए हैं- 40, 44 या 47। फिर उनके बाद के 100 शहीदों के लिये आँसू तो भूल ही जायें।

अब: तवलीन सिंह अपने ज़ख़्म सहला रही हैं- जिस बेटे ने मोदी की जीत को असली भारत की लुटियन्स ज़ोन पर जीत बताया था, के एक लेख ख़िलाफ़ लिख देने पर उसकी नागरिकता छीन लेने का ज़ख़्म!

तासीर की बूढ़ी नानी के बिलखने पर भी निज़ाम के न पिघलने का ज़ख़्म।

बुद्धिजीवियों की घनघोर कमी वाले दक्षिण पंथ की स्टार रहे होने के बाद ट्विटर भर भर आईटी सेल की गाली खाने का ज़ख़्म! 

नुपुर अलंकार का भी वही: कभी मोदी विरोधियों को पानी पी पीकर गाली देने के बाद पीएमसी बैंक डूबने पर ज़ेवर बेच कर, उधार पर जीकर खबरों के मुताबिक़ अब अवसाद में जी रही हैं, घर से बाहर! 

पायल रोहतगी: नफ़रत बरसा कर, जेल जाकर भी न सुधरकर: अब यस बैंक पर टेसुए बहा रही हैं! 

क्या मुझे इनमें से किसी के लिए दुख है?

बिलकुल नहीं! 

धर्मांघों को, नफरतियों को भी वही दुनिया मिलेगी न जो वो बनाते हैं। 

उन्हीं की भाषा में- 

कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। 
जो जस करहि सो तस फल चाखा।।

उर्फ: कर्मा इज ए.... 


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