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नव-देशभक्तों के नाम एक जेएनयू वाले का खुला ख़त

जेएनयू की एक बहुत पुरानी शाम से उतने भी प्यारे नहीं देशभक्तों, भारत माता के वीरों (मुँह खुलते ही स्त्रियों को गालियाँ देने वालों को सप...

February 19, 2016

झंडा ऊँचा रहे हमारा से डंडा ऊँचा रहे हमारा तक- देशभक्ति की रथयात्रा

आदरणीय स्मृति ईरानी जी बीए पास या बीकाम एक साल शपथपत्रानुसार
मानव संसाधन बोले तो उच्च शिक्षा मंत्री भारत सरकार
सादर प्रणाम

आशा है आप सकुशल होंगी, मैं वैसे भी ईश्वर से नित्य आपके लिए मंगलकामना और आपके रहते देश भर के छात्रों की कुशलता की प्रार्थना किया करता हूँ. सादर निवेदन यह है कि मैं यह पत्र देश के सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में भारत का झंडा, अपना प्यारा तिरंगा, फहराने के निर्णय से प्रफुल्लित होकर लिख रहा हूँ. पहले तो इसलिए क्योंकि आजादी की पूर्व संध्या पर तिरंगे को अपमान का प्रतीक बताने वाले  संघ कबीले का झंडा फहराना अपने आप में बड़ी बात है. अपने नागपुर मुख्यालय पर 52 साल न फहराया वीरों ने. और जब कुछ देशद्रोहियों ने जबरन दीवाल फांद फहरा दिया तो उनपर मुकदमा भी किया- वह तो बुरा हो मुई देशद्रोही अदालत का जिसने लताड़ के झंडा फहराने का आदेश दिया. फिर संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य अभी पिछले साल ही तो भारत के झंडे को तिरंगे से बदल भगवा करने की मांग कर रहे थे. इस हिसाब से देखें तो आपका यह आदेश संघ के खिलाफ बड़ा विद्रोह है. यह आदेश यह भी साफ़ करता है कि आप संघी होने के बावजूद देशभक्त हैं.

ऊपर से अब कम से कम एक चीज में भारत के विश्वविद्यालय दुनिया के किसी विश्वविद्यालय से आगे होंगे- अपने देश का झंडा फहराने में. अबकी बार जब फिर सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में जेएनयू, हैदराबाद जैसे गिने चुनों को छोड़कर किसी भारतीय शिक्षण संस्था का नाम नहीं देखूंगा तो गर्व से ललकार सकूँगा- होंगे ऑक्सफ़ोर्ड कैंब्रिज कहीं के- अपने देश का झंडा फहराते हैं?

बाकी मंत्री जी, क्षमाप्रार्थी होकर एक बात समझना चाहता हूँ. क्या है कि मैं सब जगह पढ़ रहा हूँ कि आपने झंडा फहराने का आदेश ही नहीं दिया है- जिस डंडे पर उसे फहराया जायेगा उसकी ऊंचाई 207 फीट भी तय की है. मने ये बात हमारी बुद्धि में एकदम न घुसी बावजूद इसके कि अपने स्कूल में हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को हमारा भाषण जरुर होता था- बभनान वाले सरस्वती शिशु मंदिर में रामशंकर आचार्य जी संचालन करते हुए बुलाते थे- अब तृतीय कक्षा के भैया अविनाश पाण्डेय गणतंत्र या स्वाधीनता- जो भी हो दिवस पर अपनी बात रखेंगे.

हम सामान्य ज्ञान में भी तेज थे मंत्री जी और यह दिखाने का कोई मौका नहीं चूकते थे- ज्ञान ठेल देते थे कि ध्वज की लम्बाई चौड़ाई में 3:2 का अनुपात होना चाहिए, सबसे बड़ा झंडा इतने फीट लंबा इतने फीट चौड़ा होगा, इसे ऐसे फहराया जाना चाहिए, मैला या फटा हुआ नहीं होना चाहिए, जो शिशुगण अपने हाथ में झंडा लेकर खड़े हैं ऐसे खड़े हों आदि आदि.  हम ध्वज संहिता भी पढ़े थे- पापा के कॉलेज से मंगवा के. लेकिन उसमें कहीं डंडे की लम्बाई का कोई निर्देश तो नहीं था, आपको कैसे सूझा?

कहीं आप पटियाला हाउस के बुद्धि के हों न हों बाहु और गालियों के बली उन वकीलों से तो प्रभावित नहीं हो गयीं जो झन्डे के बहाने सोंटा लेकर आये थे? वे जो भारत माता की जय बोलने के ठीक बाद महिला रिपोर्टरों को माँ बहन की गाली दे सकने वाले विराट देशभक्त हैं? उनसे प्रभावित होना ठीक बात नहीं है मंत्री जी- एक तो उनकी वकालत की डिग्री आपकी येल वाली डिग्री जैसी ही है- भले ही मिली तीन साल में हो आपकी तरह एक हफ्ते में नहीं. दूसरे उनके लिए झन्डा सोंटा भर है- घर पर बीबी से शुरूकर बाहर जो असहमत हो उसे मार देने वाला सोंटा. तीसरा 207 फीट का झंडा तो उनके काम भी न आएगा- भले निरे गुंडे हों- इतना बड़ा सोंटा कैसे संभालेंगे, उससे किसको मारेंगे?

ऊपर से वे अपने मालिकों को ही नुकसान भी पहुंचाते हैं- देखिये आपके द्वारा खरीदे मीडिया को भी आपके खिलाफ बोलने पर मजबूर कर दिया उन्होंने. इतना मारा, इतना  मारा कि छी न्यूज़ वाले तिहाड़ी और टाइम्स नाऊ वाले चिल्लाऊ दिहाड़ी के अलावा सब आपके खिलाफ सड़क पर उतर आये. बताइये, हो गया न सब पैसा बरबाद?    

बाकी आप ताजा शपथपत्रानुसार बी कॉम प्रथम वर्ष पास (कायदे से इसे बीकॉम फेल माना जायेगा) हों या बीए पास- आप की बातें सुन के लगता नहीं कि आप उनसे प्रभावित होंगी- उसके लिए आपके मंत्रिमंडल में साध्वी निरंजन ज्योति (वही रामजादे हरामजादे बयान वाली) और गिरिराज सिंह (पाकिस्तान भेजो- सोनिया काली होतीं तो) हैं ही. सो सोचा आपसे खुद ही पूछ लूँ कि ये झंडे की जगह डंडे पर ध्यान का चक्कर क्या है.

बाकी आपसे सविनय निवेदन यह भी है कि डंडा जितना भी ऊंचा रहे, झंडा सीधा ही फहराइयेगा. याद है न कि हरदोई वाले कार्यक्रम में आपउल्टे झंडे को सलाम करके चली आयीं थीं तो सिकुलर सब कितना हँसे थे! हमारा तो कलेजा ही फट गया था- जरा सी गलती नहीं देखी जाती नासपीटों से. ये नहीं कि ये देखें कितना काम करती हैं मंत्री जी- बंडारू दत्तात्रेय एक चिट्ठी लिख दे तो तब तक चिट्ठी लिखती हैं जब तक देशद्रोही सब खुद को मार लेने पर मजबूर न हों जाएँ- हर्रे न फिटकरी रंग आवे चोखा टाइप. पोंडिचेरी में भी कितना चिट्ठी लिखी थीं आप- इस्लामीकरण के खिलाफ. हमको बहुते अफ़सोस, नहीं नहीं, के विधर्मी भाषा निकल गयी- दुःख हुआ था जब वहां का वीसी मुकर गया कि ऐसा कुछ नहीं है. उसको हटायीं कि नहीं वैसे? 

देखिये, फिर बात भूल गया. इतने ऊंचे डंडे की एक दिक्कत यह भी है, झंडा उल्टा टंग गया तो बदलने में बहुत मुश्किल होगी। फिर आपको उतने छोटे पर- नजदीक से नहीं समझ आया कि उल्टा है तो और भी दिक्कत हो जाएगी न. बार बार जगहंसाई का मौका देना ठीक बात नहीं है न. फिर झंडा ऊँचा रहे हमारा गीत का मतलब डंडे की ऊंचाई से नहीं था. 

बाकी कम लिखा ज्यादा समझिएगा. आपका प्रतिउत्तर शीघ्र मिला तो कृतार्थ होऊंगा.

सदैव आपका आभारी कि आप हमारी पढ़ाई पूरी होने के बाद मंत्री बनीं
अविनाश पाण्डेय (समर) 

2 comments :

  1. समर कबसे इश्वर को मान्ने लगा कि स्मृति के लिए "इश्वर से पार्थना"! kidding!

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  2. आपने मजाक मजाक में बहुत खरी-खोटी सुना दी हैं स्मृति जी को😝शानदार हैं यूँ ही आप कटाक्ष करते रहें व सच बोलते रहें!!

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