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August 06, 2015

बेवफा तूफ़ान उर्फ़ लिंफा तूफ़ान का खौफ

[दैनिक जागरण में अपने कॉलम परदेस से में 11-07-2015 को प्रकाशित] 


कंबोडिया की यादों के बीच अचानक तूफ़ान आ गया. न न, दिल में नहीं बल्कि इस मौसम में हांगकांगमें आते रहने वाला समुद्री तूफ़ान- वह जिसकी आदत इस शहर जो वैसे ही है जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश को लू और मुंबई को बारिश की होती है. इन तूफानों से शहर और उसके हम जैसे बाशिंदों की ऐसी यारी है कि ‘ट्रॉपिकल रेनस्टॉर्म’ माने भयानक मूसलाधार बारिश में भी कामकाज नहीं रुकता, ऑफिस जाना होता है. बाकी शहर की व्यवस्था ऐसी चाक चौबंद है कि यहाँ आप आत्महत्या करने पर आमादा न हों तो टाइफून नूरी की शहर से सीधी भिड़ंत पर भी आपका कुछ नहीं होना- सिग्नल
9 माने 100 किलोमीटर से ज्यादा तेज, और हिंसक, हवा और भयानक बारिश वाले उस तूफ़ान ने शहर को थाम के रख तो दिया था पर जान केवल उन दो लोगों की ले पाया था जो न जाने क्या सोच कर तैरने चले गए थे!
हकीकतन इस शहर का कामकाजी हिस्सा दबी जुबान टाइफून का इन्तजार ही करता है और दुआएँ मांगता है कि सिग्नल 8 से ज्यादा हो ताकि उसे छुट्टी मिल जाय. बेशक मालिकान इसीलिए टाइफून से नफ़रत भी करते हैं – यह उनकी दुकानें जो बंद करवा देता  है. रेस्टोरेंट मालिकान के संगठन का अनुमान है कि लिंफा की वजह से एक शाम में ही उनका 70 मिलियन हांगकांग डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो गया, और यह दावा कुछ ख़ास गलत नहीं होगा.

खैर, कल इस साल के पहले टाइफून लिंफा की आमद की खबरें मौसम विभाग की वेबसाइट के साथ हवाओं में आ गयी ठंडक में भी थीं. उनके साथ था इन्तजार- मौसम विभाग ने टाइफून के सुबह तक 8 नंबर तक पहुँचने की उम्मीद जता कर तमाम दिलों में सप्ताहांत के लम्बे हो जाने की उम्मीदें जगा दी थीं.
पर फिर मौसम विभाग ने दफ्तरों में लिंफा को टी 1 से टी 3 तक पहुँचते देख खुश हो रहे लोगों को शाम 5 बजे या पहले ही टी8 लागू होने की घोषणा करके अचानक चौंका दिया था. हाँ, इस शहर के टाइफून से खूबसूरत से रिश्ते में यह एक खटराग है. सिग्नल 8 मतलब शहर बंद. सिग्नल 8 मतलब लागू होने के पहले घर वापस भागते लोगों की वजह से पूरी तरह भर गयी सड़कें, बसें, एमटीआर (हाँ, यहाँ मेट्रो को एमटीआर कहते हैं). सिग्नल 8 माने थोड़ी देर में शुरू होने वाली मूसलाधार बारिश के चलते तमाम पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, निचले इलाकों में वक्ती बाढ़ और हाँ, आप बदकिस्मत हों तो सड़कों पर लग जाने वाले जाम.
और फिर सबसे भयानक मतलब- आप फंस गए, घर नहीं पहुँच पाए तो सिग्नल 8 का मतलब वहाँ तब तक फंसे रहना जब तक तूफ़ान गुजर न जाए मतलब कम से कम 8 घंटों से लेकर दिनों तक! टाइफून नूरी ने शहर को दो दिन से ज्यादा नवाजा था और उन पूरे 48 घंटे अपने अपार्टमेंट में फंसे रहे होने की याद आज भी सिहरा देती है. हाँ यह जरुर है कि उस बार के बाद कभी अपने घर में खाने पीने और बुनियादी जरूरतों की चीजों की कमी नहीं होने दी. क्यों? क्योंकि सिग्नल 8 माने घर में सुरक्षित होने पर भी सामान ख़त्म हो जाने पर कुछ न मिलने, भूखे रहने की मजबूरी.
सो टी 1 और टी 3 पर कंधे उचका देने वाले इस शहर में मामला T8 पर आते ही संगीन हो जाता है, कल भी हुआ. दिन के दूसरे हिस्से में टाइफून आने पर न मिली छुट्टी को याद कर लोग उदास हो जाते हैं, कल भी हुए. पुलिस, प्रशासन, परिवहन सब शानदार कार्यकुशलता से लोगों को घर पहुंचाने, उनकी मदद करते हैं कल भी किया.

पर एक बात थी जो दिलचस्प थी. टाइफून आने की घोषणा तो हुई पर टाइफून आया नहीं. मतलब कल जितनी तेज हवाएं तो यहाँ रोज चलती हैं, कल जितनी बारिश भी रोज ही होती है! शहर पहले टाइफून की छुट्टी मारे जाने पर उदास होता था, इस बार नाराज है. मौसम विभाग को निरे तथ्यों पर यकीन करने की जगह ‘व्यवहारिक’ होने की सलाहें मिलती मैंने पहली बार देखी हैं. बखैर, अभी तो सितम्बर दूर है- इस बार चाय की प्याली में आये बेवफा तूफ़ान को असली तूफ़ान में बदलते देखने के तमाम मौके बाकी हैं.

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