Featured Post

नव-देशभक्तों के नाम एक जेएनयू वाले का खुला ख़त

जेएनयू की एक बहुत पुरानी शाम से उतने भी प्यारे नहीं देशभक्तों, भारत माता के वीरों (मुँह खुलते ही स्त्रियों को गालियाँ देने वालों को सप...

September 05, 2011

बकरियों को पानी पिलाती इस बच्ची की ‘जात’ भी बताओगे अन्ना-भक्तों?









तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं. कई बार तो इतना कुछ की सारे शब्द गैरजरूरी हो जाते हैं और नजर उन तस्वीरों के सच को समझने को नाकाफी. ऐसी ही चंद तस्वीरें यहाँ हैं.. देखें और इनके द्वारा उद्घाटित सत्यों से जूझें, गर हो सके तो!

दृश्य 1- यह अन्ना के अनशन को तोड़ने के वक्त की तस्वीर है. उनको पानी पिलाती दो बच्चियों की तस्वीर! उस वक्त की जब अन्ना के अनशन के शुरुआती उन्माद के बाद बहुत कुछ साफ़ होने लगा था. उन वक्तों की जब अरविन्द केजरीवाल के जेनयू में दिए गए ओबीसी आरक्षण विरोधी भाषणों के अर्थ समझने की कोशिशें शुरू हो गयी थीं. उन वक्तों की जब आरक्षण को देश बांटने का खतरा बताने वाले 'श्री श्री रविशंकर' के बयान फिर से पढ़े जा रहे थे. उन वक्तों की जब अन्ना के मंच पर मौजूद तमाम संतों की विश्व हिन्दू परिषद् की धर्म संसदों के मंच पे बैठे होने की तस्वीरें कम से कम सोशल मीडिया पर जारी होने लगी थीं.

इसीलिये, अन्ना को पानी पिलाती इन मासूम बच्चियों की 'जात' बताना अन्ना और उनकी टीम के लिए बेहद जरूरी हो चला था. उन्होंने बताया भी, की इनमे से एक बची दलित है और और दूसरी मुस्लिम.

इस तस्वीर के ठीक बाद इन तस्वीरों को देखिये जो अन्ना के आन्दोलन के रंगमंच दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश के रींवा जिले में एक शोध के सिलसिले में भ्रमण करते हुए मेरे द्वारा ली गयी हैं.

दृश्य 2- यह अपने गाँव से बहुत दूर ग्राम समाज के साझे चारागाह में बकरियों को पानी पिलाते हुए बच्ची की तस्वीरें हैं. एक बच्ची जिसकी उम्र अन्ना को पानी पिलाती बच्चियों की उम्र के बराबर ही होगी. अपने कद से जरा सी ही छोटी बाल्टी ढो रही इस बच्ची को देखें.

दृश्य 3 - एक बकरी के सामने पानी रख कर यह बच्ची अब दूसरी बाल्टी लाने जा रही है. वह बाल्टी जो आप अभी तक देख नहीं पाए थे.

दृश्य 4- अब यह बच्ची अपनी दो बकरियों के साथ है..

दृश्य 5 - अब आप दोनों बाल्टियां देख सकते हैं. लगभग खाली हो चली बाल्टियां..

दृश्य 6 - बच्ची अब घर लौट रही है, बशर्ते की हमारा आपका 'मध्यवर्गीय' मन उसकी टूटी-फूटी सी झोपडी को घर मानने की इजाजत दे सके. घर की चारागाह से दूरी का अंदाज भी आप चाहें तो इस तस्वीर से लगा ही सकते हैं क्योंकि मैंने अपनी जगह नहीं बदली है. सिर्फ मोटरसाइकिल पर बैठे बैठे कैमरे की दिशा बदल दी है.

दृश्य 7 - लगभग दृश्य ६ की पुनरावृत्ति है. बस कैमरे को थोडा जूम पर ले लिया है!

[थोड़ा सा ध्यान दें तो एक और बात नजर आएगी, यह कि बच्ची ने अपने स्कूल के कपड़े पहने हैं. शौकिया, या फिर उसके पास और कपड़े हैं ही नहीं यह आप तय कर लें!]

मेरे दिल में एक सवाल आ रहा है बस.. की अन्ना को पानी पिलाने वाली बच्चियों की 'जात' का ऐलान करने वाले क्या इस बच्ची की 'जात' भी पूछेंगे, बताएँगे? शायद नहीं, क्योंकि इस बच्ची की 'जात' तो वो पहले से ही जानते हैं! वे ही क्या, पूरा इण्डिया ही इस बच्ची की जात जानता है! जाने भी क्यों न, श्रेणीबद्ध विषमताओं वालों यही समाज है जिसमे ऊपर जाने की सीढियां नीचे वालों के नसीब में नहीं होतीं!

अब तय हमें करना है कि हम उनके जन्म की दुर्घटना के आधार पर बच्चों का भविष्य उनके माथे पर लिख देने वाले मनु बाबा और उनके नए अवतार अन्ना के ‘इण्डिया’ के साथ खड़े हैं या..

No comments :

Post a Comment