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September 21, 2010

जहाँ बाबरी मस्जिद थी वहां अस्पताल बना दो? पर क्यूँ भाई?

सच बोलने से डर लगने लगे ऐसे वक़्त, पाश के शब्द उधार लूँ तो, खतरनाक तो हैं पर सबसे खतरनाक नहीं होते. सबसे खतरनाक वो वक़्त होते हैं जब मजलूम भी जालिम की जुबान बोलने लगें. सबसे खतरनाक इसलिए कि ऐसे वक्तों उनके चेहरे पे पसरी हुई दहशत बिलकुल साफ़ नज़र आती है. आईने की तरह. आयर जब हम उनकी आँखों में झांकते हैं तो जो डरा हुआ चेहरा नज़र आता है वो उनका नहीं हमारा होता है. सफ़ेद, शफ्फाक. नजर चुराती हुई ऑंखें, कहीं दूर अदृश्य में कुछ देखती हुई.

ये वक़्त सबसे खतरनाक होते हैं क्यूंकि इन वक्तों में हवाओं में सच शगूफों से उछलते रहते हैं और जमीन में एक अजब अहमकाना और कातर चुप्पी पसरी होती है. फिर ये होता है कि हम सच और शगूफों का फरक भूल जाते हैं.

जैसे ये कि जहाँ बाबरी मस्जिद थी, जो इन फिरकापरस्तों ने ढहा दी थी वहां अस्पताल बना दो. वहां बच्चों का खेल बना दो. वहां ये बना दो. वहां ये बना दो. बस जो एक बात कोई नहीं करता वो ये कि जहाँ बाबरी मस्जिद थी वहां बाबरी मस्जिद बनाओ. वहां कुछ और बनाना इन्साफ के खिलाफ तो है ही पर उससे ज्यादा हम डरे हुए लोगों का अरण्य रोदन है. जंगल विलाप है.

अगर यही करना है तो क्यूँ ना ऐसा करें की इन को बोलें कि भाई तुम तोड़ते चलो हम बनाते चलेंगे. तुम मस्जिद तोड़ो, हम अस्पताल बनायेंगे. तुम चर्च, तोड़ो हम स्कूल बनायेंगे. तुम गुरुद्वारा तोड़ो, हम बच्चों के खेलने का मैदान बनायेंगे. बस एक बात, जो तुम तोड़ोगे, वो हम कभी नहीं बनायेंगे. और फिर, इस मुल्क में किसी और का कहने को कुछ नहीं होगा.

सवाल ये है कि जो तोडा था वही क्यूँ न बनायें. क्यूंकि इससे दंगों का खतरा है. क्यूँ भाई? पुलिस है, प्रशाशन है वो बस चुप बैठा रहेगा? सेना है जो कश्मीर के, उत्तर पूर्व के पूरे अवाम को चुप रख सकती है( लोकतान्त्रिक सरकार के आदेश से) वो चंद दंगाइयों से नहीं निपट सकती? अगर नहीं, तो रखा क्यूँ है भाई?

और अगर कुछ और ही बनाना है, मस्जिद नहीं तो एक अहसान करो. अस्पताल मत बनाओ. जिस जगह के नाम पे इतने लोगों का क़त्ल हुआ वहां जान बचाने की बातें अच्छी नहीं लगेंगी. पार्क मत बनाओ भाई. क्या खेलेंगे लोग वहां? दंगों के खेल? और क्या रंग आएगा ऐसे पार्क में खिलने वाले फूलों पे? लाल खून का रंग?

बच्चों का स्कूल मत बनाओ- क्या पढेंगे बच्चे उस स्कूल में? कि दूसरों की इबादतगाह तोड़ने के कोई सजा नहीं होती? उनके गाने बदल जायेंगे ऐसे स्कूल में पढ़ के. और यकीन करिए कि मजहब ही सिखाता है आपस में बैर करना गाते हुए बच्चे और कुछ भी लगें बच्चे नहीं लगें.

तो भाई, कुछ और ही बनाना है तो एक काम करो.

जहाँ मस्जिद थी वहां कोमनवेल्थ खेलों का एक मैदान बना दो. कम से कम कुछ भ्रष्ट और बेईमान नेताओं का फायदा तो होगा.

या उससे भी बेहतर, एक नकली गाँव बना दो. राहुल गांधियों के लिए गरीबों की झोपड़ी में रात गुजारना आसान हो जायेगा, और ये जगह देश की संस्कृति (अगर कोई है तो) विदेशियों को बेचने के काम भी आएगी.

या फिर मनमोहन सिंह साहब के लिए एक स्थाई मंच बनवा दो. फिर वो कह ही नहीं दिखा भी सकेंगे की अंग्रेजों से क्या सुशासन और क्या सूरज सिखा है.

और इस सबसे बेहतर, एक जंगल लगवा दो. उत्तर प्रदेश पुलिस को फर्जी मुठभेड़ों के लिए एक अच्छी जगह भी मिल जाएगी और जम्हूरियत और इन्साफ के क़त्ल की जगह का इससे अच्छा इस्तेमाल हो भी क्या सकता है?

12 comments :

  1. मेरे ख्याल से ये मुद्दा अदालत में ही रहे तो अच्छा है.

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  2. ya ambani kaa aik shoping mall bana de ayodhya ke logon ke dekhne ke liye aik achi cheej mil jayee gii,,,,,,,,,,kya khayal haiiiiiiiiii,,,,,,,,babri masjid kabhi na bane warna danga hone ke chances hai ,,,bharat me

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  3. AAp to Court ka Judgment aane ke pahale hi comments karne lage bhai? thora intjar kijiye!! Janaab!!

    Her political partyio ki rozi roti isi pe chal rahi hai, unse ab injaar nahi ho pa raha hai jaise watch ki sui achanak se slow chalane lagi hai aur ek-ek-pal bahut lambi ho rahi hai.
    "Is desh me agar mushlim samaj ki wakalat karo to aap dharm-nirpeksh kahlaoge! aur
    agar Hinduo ki wakalat karoge to sampradayikta wadi kahlaoge"!!

    Court ka chahe jo bhi judgement aaye, ussase nuksaan to desh ka hi hoga.

    kuch logo khush honge to kuch udaas, kuch ki dal-roti "Judgment" ke analysis me chalegi to kuch ki dharna pradarshn me, kuch news banayenge, kuch views denge, kuch paper me chhapenge to kuch channel pe dikhayenge aur isi me lakho se leker crore kamayenge.

    Aise hi history ka nirman hota hai bhai, jo dabang hote hai wo apani dabangai ke niche sabhi ko dabayenge aur itihash banayenge. Aap bhi apne bachcho ko yahi itihash ka path padhayenge aur hum bhi, aur ek chhota sa bachcha jo sayad isi itihash ko yaad karne ke chakkar me insaniyat ka path shayad bhool jayega.

    Thanks
    Anup Kumar Srivastava
    Human Rights Activist, India

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  4. @ chitra, agar sab log kuch na kuch karenge jaise koi virodh karega koi kush hoga, koi news banayega koi views lega etc etc, to phir kya hona achhaiye...hoga ye ki jo bhi faisala aayega uske baad SC me arji hogi phir se 10 saal aur jod lo..uske baad president ke pass jayega..5 aal aur jod lo..tab tak humlog comment hi pass karte rahenge aur jo dishi hoga wo waise bhi kat lega tab tak......

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  5. aapki baat se sahmat hoon. baat paripakvata se kahi gayi hai. par phir se hamey usi gherey mein laakar khada kar deti hai...phir hinduon ke raamlalla janmabhoomi ka vivaad, phir musalmaanon ki baabari masjid ka vivaad. dharm se bada bhi kuchh hota hai....wah hai insaaniyat...aur isi hisaab se....dharmon se parey, dharmon ke daayaron se bhi parey...ek oonchi soch rakhni hogi. mere khayal se isliye school, haspataal...ya kuchh aisa samaajopayogi banana theek rahega....in dharmon ko jabtak thenga na dikhaya jayega...tabtak aise vivadon ko jheltey, dangon se peedit rahega hamara samaaj.

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  6. bacchon ke khelne ka maidaan bnaa do, khoob saare ped lgaa do aisi imaartein jo vibhinn dharmon mein takraak paida karti hain bilkul nahi ban ni chahiyein....
    bacchon ke khelne ka maidaan kalantar koi na koi 'land mafia' aakaar jhatak lega...
    do billion aur traazu pakde hue ek bandar waali kahani mein nayee page judenge.
    apna to khyaal yehi ji !

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  7. @ Mukti- nahi.. wahan se bahar aani chahiye baat ab.

    @ Afroz- Khayal achha hai bhaai, maafi chahta hun ki mujhse chho0t gaya tha

    @Chitra- aapki baton me kai pench hain janab. human rights aur hindu rights me fark hai.

    Badre- Shukriya

    Jaya jee aur Ernest jee-- apkee chinta bhee jyaj hai dar bhee. par albert sahab, main bhee is jagah pe kuchh aur banane ke haq me ho jaunga, basharte, ye jitne dharmsthal hain, chahe jis dharm ke hon, gira ke ye school aur asptaal aur park bana den.

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  8. Muslims must give up the land 4 their Hindu brothers 4 a peaceful India. But it should not start a chain reaction of claims like on Mathura or Kashi Masjids.
    That must be assured n ensured by the executive & the judiciary of Secular democratic India. May peace & common sense prevail!
    Farhat Amez@jnu

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  9. Bhaut hi bebak rai hai...Mai aapki bat se puri tarah sahmat hun....

    Richa

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  11. waah samar bhaai aap ki qalam waqai be-baak hai...

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  12. कहाँ कहाँ क्या बनायेंगे/
    हर जगह मुंह चिपनें की सियासत के रूप में/
    जब तक धर्म और सियासत को एक तराजू पर तौला जाता रहेगा/
    इंसान को इंसान से सियासत अपना काम करवाती रहेगी खून के रूप में/
    और बदले में भीख देती रहेगी दंगे/शोले/मज़लूमियत/

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